जीएसटी का छापा : फिल कोल के मालिक प्रवीण झा ने किए 11 करोड़ सरेंडर

15 Dec 2025      105 Views

  • स्टेट जीएसटी की रेड दो दिनों तक चली, बड़े पैमाने पर कोयले में मिक्सिंग करने की जानकारी

रायगढ़। रायगढ़ में कोल डिपो फिल कोल बेनीफिकेशन और महावीर कोल वॉशरी पर स्टेट जीएसटी की छापेमार कार्रवाई पूरी हो गई। लंबे समय बाद जीएसटी ने कोयला कारोबारियों पर हाथ डाला है। फिल कोल ने 11 करोड़ की अवैध कमाई सरेंडर की है। वाणिज्यिक कर विभाग की इस कार्रवाई का नेतृत्व सचिव मुकेश बंसल कर रहे थे। उनके निर्देशन में जीएसटी टीमों ने करीब दर्जन भर ठिकानों पर कार्रवाई की। बिलासपुर के फिल कोल, महावीर कोल वॉशरी और पारस पावर एंड कोल के करीब 11 ठिकानों में छापेमारी की गई।                                        रायगढ़ में फिल कोल बेनीफिकेशन नवापारा टेंडा और महावीर कोल वॉशरी भेंगारी के फैक्ट्री और दफ्तर में छापा मारा गया है। शुक्रवार को स्टेट जीएसटी की टीमें दोनों फर्मों के रायगढ़ स्थित ठिकानों पर पहुंची।

शनिवार को भी कार्रवाई जारी रही। मिली जानकारी के मुताबिक फिल कोल के मालिक प्रवीण झा, प्रदीप झा और दिव्यांश झा ने 11 करोड़ की कमाई सरेंडर की है। वहीं महावीर कोल वॉशरीज प्रा लि ने दस करोड़ सरेंडर किए हैं। अधिकारियों ने ऑफिस, घर, प्लांट और वॉशरी में दस्तावेज खंगाले। फिल ग्रुप ने कोयले का रिजेक्ट मटेरियल भी बड़े पैमाने पर खरीदा। इसका उपयोग कहां किया गया पता नहीं। जितना कोयला एक नंबर में डिपो पहुंचा, उससे अधिक बिक्री की गई। सवाल उठता है कि जितना कोयला नहीं था, उससे ज्यादा मात्रा का विक्रय कैसे किया गया। संभव है कि कोयले में छाई, डस्ट, रिजेक्ट आदि को मिलाकर बेचा गया हो।

लाइंसेंस नहीं किया निरस्त  

फिल कोल बेनीफिकेशन तो कोयले की ट्रेडिंग करता है। फर्म को रायगढ़ में दोबारा अनुमति देने के लिए तत्कालीन खनिज अधिकारी ने लॉबिंग की। अवैध कोयला पकड़े जाने के बावजूद लाइसेंस निरस्त नहीं किया गया बल्कि पहले से अधिक मात्रा में भंडारण की अनुमति दी गई। जीएसटी रेड से यह बात साबित हो गई कि ये फर्म मिलावटी कोयला सप्लाई कर रही हैं जिससे अवैध कमाई हो रही है। मिलावटी कोयले से प्लांट को नुकसान होता है। प्रदूषण भी बढ़ता है।