कर्मचारी की मौत पर मुआवजा देने से नहीं बच सकता नियोक्ताः हाईकोर्ट

12 Jan 2026      76 Views

  • ठेकेदार के माध्यम से कार्य कराने पर भी नियोक्ता की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती

 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कर्मचारी की मौत से जुड़े एक मुआवजा मामले में नियोक्ता को बड़ी राहत देने इनकार करते हुए स्पष्ट किया है कि कार्यस्थल पर हुई मृत्यु के मामलों नियोक्ता अपनी वैधानिक जिम्मेदारी नहीं बच सकता, भले ही कर्मचारी ठेकेदार के माध्यम से कार्यरत रहा हो। यह फैसला न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु (डायरेक्टर, वेलकम डिस्टिलरी बनाम ईश्वरी बाई एवं अन्य मामला) सुनाया है। 

क्या था पूरा मामलाः मामले के अनुसार, अर्जुन कैवर्त (मृतक) 25 अगस्त 2014 को वेलकम डिस्टिलरी, छेरकाबांधा जिला-बिलासपुर में भूसा उतारने और बॉयलर में फीडिंग का कार्य कर रहा था। इसी दौरान फैक्ट्री परिसर में गैस केमिकल लीक होने से उसकी तबीयत अचानक बिगड़ी और वह परिसर के भीतर ही गिर पड़ा, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। मृतक की पत्नी ईश्वरी बाई, दो पुत्र और पिता ने कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923 के तहत श्रम न्यायालय में दावा प्रस्तुत करते हुए मुआवजा मांगा था।

श्रम न्यायालय ने मुआवजा देने का दिया आदेशः श्रम न्यायालय (कर्मचारी क्षतिपूर्ति आयुक्त) बिलासपुर ने मृतक को नियोक्ता के अधीन कार्यरत कर्मचारी माना। मृत्यु को रोजगार के दौरान और रोजगार से उत्पन्न की बात भी मानी। आश्रितों को 7,88,240 रुपये का मुआवजा और दुर्घटना की तिथि से 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज व 5,000 रुपयके अंत्येष्टि खर्च देने का आदेश दिया था।