भारत बनेगा वैश्विक कोयला आपूर्तिकर्ता, दूसरे देशों को भी बेचेगा कोयला

18 Jan 2026      54 Views

  • केंद्रीय कोयला राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे बोले—देश में कमर्शियल माइनिंग को किया जा रहा प्रोत्साहित।

पलामू। कोयला कारोबार अब वैश्विक स्वरूप ले चुका है और आने वाले समय में भारत न केवल आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि दूसरे देशों को भी कोयला निर्यात करेगा। यह बात केंद्रीय कोयला राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे ने पलामू दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में कही।

राज्यमंत्री पलामू के राजहरा कोलियरी के नव-संचालन का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि देश में कमर्शियल कोल माइनिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे कोयला उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ भारत की वैश्विक ऊर्जा बाजार में भागीदारी मजबूत होगी।

13 वर्षों बाद फिर शुरू हुआ राजहरा कोलियरी का उत्पादन

राज्यमंत्री ने बताया कि राजहरा कोलियरी से वर्ष 2010 से खनन कार्य बंद था, जिसे अब पुनः प्रारंभ किया गया है। उन्होंने कहा कि कोयला मंत्रालय के साथ-साथ पलामू के सांसद विष्णुदयाल राम के प्रयासों से यह संभव हो सका। उन्होंने कहा, “आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर देश में कोयला उत्पादन को तेज किया जा रहा है। कोयला जलकर देश को रोशन करेगा और आर्थिक प्रगति को गति देगा।”

पर्यावरण संतुलन के साथ होगा कोयला उत्पादन

कोयला राज्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि खनन कार्य पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना किया जाएगा। जहां-जहां माइनिंग के दौरान पेड़ कटे हैं, वहां दोगुने पेड़ लगाए जा रहे हैं, ताकि पर्यावरणीय संतुलन बना रहे।

स्थानीय रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

इस मौके पर पलामू सांसद विष्णुदयाल राम ने कहा कि राजहरा कोलियरी का दोबारा शुरू होना इस क्षेत्र के लिए मील का पत्थर है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी।

2037 तक होगा कोयला उत्पादन

राजहरा कोलियरी से अब 2037 तक कोयला उत्पादन किया जाएगा। इस कोलियरी की स्थापना वर्ष 1842 में हुई थी। वर्ष 2010 में डायरेक्टर जनरल माइंस सेफ्टी (DGMS) की गाइडलाइंस के तहत यहां उत्पादन बंद कर दिया गया था।

राजहरा कोलियरी में 4.9 मिलियन टन कोयले का भंडार है, जो जी-9 श्रेणी में आता है। यहां का कोयला विश्वभर में अपनी गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध रहा है। वर्ष 1991 तक भूमिगत खनन होता रहा, इसके बाद ओपन कास्ट माइनिंग शुरू की गई थी।