1 अप्रैल से बदल जाएगा इनकम टैक्स का गणित

14 Mar 2026      34 Views

  • नए आयकर अधिनियम के साथ 7 बड़े बदलाव, उद्यमियों और निवेशकों पर पड़ेगा सीधा असर

नई दिल्ली। देश की कर व्यवस्था में 1 अप्रैल 2026 से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट 2026 के तहत नया आयकर अधिनियम 2025 लागू किया जाएगा, जिससे करीब 65 साल पुराने आयकर कानून में व्यापक परिवर्तन होगा। सरकार का उद्देश्य टैक्स प्रणाली को सरल, पारदर्शी और कम जटिल बनाना है। इन बदलावों का प्रभाव आम टैक्सपेयर्स के साथ-साथ उद्यमियों, व्यापारियों, निवेशकों और कॉरपोरेट सेक्टर पर भी पड़ेगा। कुछ बदलाव राहत देने वाले हैं, जबकि कुछ मामलों में टैक्स का बोझ भी बढ़ सकता है।

नया आयकर अधिनियम 2025 होगा लागू

1 अप्रैल 2026 से देश में आयकर अधिनियम 1961 की जगह नया आयकर अधिनियम 2025 लागू होगा। नए कानून में भाषा को सरल बनाया गया है और कई जटिल कानूनी प्रावधानों को हटाया गया है। हालांकि सरकार ने फिलहाल टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है और वर्तमान स्लैब ही लागू रहेंगे।

ITR दाखिल करने की समय सीमा में बदलाव

सरकार ने कुछ आयकर रिटर्न की समय सीमा बढ़ा दी है।

ITR-1 और ITR-2: अंतिम तिथि 31 जुलाई (यथावत)

ITR-3 और ITR-4: अंतिम तिथि 31 अगस्त (पहले 31 जुलाई)

टैक्स ऑडिट की अंतिम तिथि: 31 अक्टूबर

यह बदलाव विशेष रूप से व्यवसायियों और पेशेवरों को रिटर्न दाखिल करने में अतिरिक्त समय देगा।

रिवाइज्ड रिटर्न के लिए अधिक समय

यदि किसी करदाता से ITR भरते समय गलती हो जाती है तो उसे सुधारने के लिए अब अधिक समय मिलेगा।

रिवाइज्ड रिटर्न की अंतिम तिथि अब 31 मार्च होगी।

पहले यह सीमा 31 दिसंबर तक थी।

हालांकि 31 दिसंबर के बाद रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है।

TCS दरों में बदलाव

सरकार ने कई वस्तुओं पर टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) की दरों में संशोधन किया है।

शराब की बिक्री पर TCS 1% से बढ़ाकर 2%

स्क्रैप की बिक्री पर TCS 1% से बढ़ाकर 2%

कोयला, लिग्नाइट और लौह अयस्क की बिक्री पर 2% TCS

तेंदूपत्ता की बिक्री पर TCS 5% से घटाकर 2%

इन बदलावों का असर खनन, स्क्रैप और ट्रेडिंग सेक्टर से जुड़े कारोबारियों पर पड़ेगा।

विदेश यात्रा पर TCS में राहत

विदेश यात्रा या विदेश में भुगतान से जुड़े नियमों को सरल बनाया गया है।

विदेश यात्रा पैकेज पर अब सिर्फ 2% TCS लगेगा।

पहले यह दर 5% या 20% तक थी।

इसके अलावा विदेश में शिक्षा और चिकित्सा खर्च के लिए भेजी जाने वाली राशि पर भी TCS घटाकर 2% कर दिया गया है।

डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर बढ़ा STT

शेयर बाजार के डेरिवेटिव सेगमेंट में ट्रेडिंग करने वालों के लिए लागत बढ़ेगी।

फ्यूचर ट्रेडिंग पर STT 0.02% से बढ़कर 0.05%

ऑप्शन ट्रेडिंग पर STT 0.1% से बढ़कर 0.15%

इससे डेरिवेटिव मार्केट में सक्रिय निवेशकों और ट्रेडर्स की लागत बढ़ सकती है।

शेयर बायबैक और डिविडेंड पर नया प्रावधान

1 अप्रैल 2026 से कंपनियों द्वारा किए जाने वाले शेयर बायबैक पर नई कर व्यवस्था लागू होगी। अब बायबैक से प्राप्त राशि पर कैपिटल गेन टैक्स लगाया जाएगा।

कॉरपोरेट प्रमोटर्स: 22% टैक्स

नॉन-कॉरपोरेट प्रमोटर्स: 30% टैक्स

इसके साथ ही डिविडेंड आय पर ब्याज खर्च की कटौती समाप्त कर दी गई है। पहले डिविडेंड कमाने के लिए लिए गए ऋण के ब्याज पर 20% तक की कटौती मिलती थी, लेकिन अब यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी।

टैक्स प्लानिंग पर देना होगा विशेष ध्यान

कर विशेषज्ञों के अनुसार नए बदलावों के बाद उद्यमियों और निवेशकों को अपनी टैक्स प्लानिंग, निवेश रणनीति और वित्तीय प्रबंधन को नए नियमों के अनुरूप ढालना होगा। सही समय पर योजना बनाकर इन बदलावों के प्रभाव को संतुलित किया जा सकता है।