23 Mar 2026 58 Views
नई दिल्ली। देश की कर व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में केंद्र सरकार 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर कानून लागू करने जा रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि “करदाता आपका विरोधी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में साझीदार है।”
राष्ट्रीय आयकर जागरूकता अभियान के दौरान उन्होंने बताया कि सरकार अब केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि करदाताओं के साथ संवाद, विश्वास और सहयोग को भी प्राथमिकता दे रही है।
नया आयकर अधिनियम 2025, 1961 के पुराने और जटिल कानून की जगह लेगा, जो समय के साथ हजारों संशोधनों के कारण बेहद उलझा हुआ हो गया था। नए कानून में शब्दों की संख्या लगभग 5.12 लाख से घटाकर 2.6 लाख कर दी गई है, जबकि धाराएं 819 से घटकर 536 रह गई हैं। इससे न केवल नियमों को समझना आसान होगा, बल्कि कर विवादों और अदालतों में लंबित मामलों में भी कमी आने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को “डर और भ्रम” से निकालकर “सरल और भरोसेमंद” बनाना है, जिससे स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा मिल सके।
नए प्रावधानों में विशेष रूप से छोटे व्यापारियों, उद्यमियों और नौकरीपेशा वर्ग को राहत देने का प्रयास किया गया है। 10 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले कारोबारियों को कम नकद लेनदेन (5 प्रतिशत से कम) की स्थिति में ऑडिट से छूट मिलेगी। साथ ही प्रेजम्प्टिव टैक्स स्कीम को और मजबूत किया गया है। वेतनभोगियों के लिए “पिछले वर्ष” और “निर्धारण वर्ष” जैसी जटिल अवधारणाओं को सरल किया गया है, जबकि होम लोन ब्याज से जुड़े नियमों को अधिक स्पष्ट बनाया गया है।
वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ सैलरी स्ट्रक्चर में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे। नई व्यवस्था के तहत कुल वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत बेसिक पे होगा, जिससे पीएफ और ग्रेच्युटी में वृद्धि होगी। हालांकि अलाउंसेस में कमी या उनके मर्ज होने के कारण इन-हैंड सैलरी में हल्का बदलाव संभव है।
सरकार ने नए टैक्स रिजीम को डिफॉल्ट विकल्प बनाने का निर्णय लिया है, जिसमें टैक्स दरें कम हैं लेकिन डिडक्शन सीमित हैं और प्रक्रिया सरल है। यह व्यवस्था उन करदाताओं के लिए अधिक उपयुक्त मानी जा रही है, जिनके पास निवेश या छूट कम हैं, जैसे फ्रीलांसर या साधारण वेतनभोगी। वहीं, पुराने टैक्स रिजीम में 10 से 30 लाख रुपये तक की आय वाले तथा होम लोन, एचआरए, 80C और एनपीएस जैसी छूट लेने वाले करदाताओं के लिए अब भी लाभ की संभावना बनी हुई है।
वित्त मंत्री ने आयकर विभाग को निर्देश दिए हैं कि करदाताओं के साथ सहानुभूति और निष्पक्षता से व्यवहार किया जाए तथा मानवीय हस्तक्षेप को कम कर तकनीक के उपयोग को बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और विश्वास ही नई कर प्रणाली की आधारशिला होंगे।
कुल मिलाकर, नया आयकर कानून और बदला हुआ सैलरी ढांचा भारत की कर व्यवस्था को एक नए दौर में ले जाने की तैयारी का संकेत देता है, जहां टैक्स भुगतान न केवल आसान होगा, बल्कि करदाता और सरकार के बीच विश्वास भी और मजबूत होगा।