छत्तीसगढ़ में ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ की बड़ी खोज! महासमुंद के भालुकोना में ड्रिलिंग प्रारंभ

25 Mar 2026      99 Views

  • करीब 30 वर्ग किलोमीटर में फैले इस ब्लॉक में शुरुआती अध्ययन और सैंपलिंग में निकल, कॉपर और प्लेैटिनम की मौजूदगी के संकेत मिले हैं।
  • इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र के लिए जरूरी धातुओं की होगी माइनिंग।

वैश्विक ऊर्जा संकट और स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती मांग के बीच छत्तीसगढ़ देश को एक बड़ी खुशखबरी देने की ओर अग्रसर है। महासमुंद जिले के भालुकोना-जमनीडीह क्षेत्र में दुर्लभ और रणनीतिक खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) की मौजूदगी के संकेत मिलने के बाद अब यहां ड्रिलिंग कार्य शुरू कर दिया गया है। आगामी दो सप्ताह में आने वाली रिपोर्ट से खनिजों की गुणवत्ता और मात्रा का स्पष्ट आकलन हो सकेगा।

करीब 30 वर्ग किलोमीटर में फैले इस ब्लॉक में प्रारंभिक सर्वे और सैंपलिंग के दौरान निकल, कॉपर और प्लेटिनम ग्रुप एलिमेंट्स (PGE) की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। यदि अंतिम परिणाम उम्मीद के अनुरूप आते हैं, तो यह परियोजना भारत के क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

डक्कन गोल्ड माइंस को जिम्मेदारी
राज्य सरकार ने विस्तृत सर्वे के बाद इस परियोजना का कार्य देश की प्रतिष्ठित कंपनी डक्कन गोल्ड माइंस लिमिटेड को सौंपा है। कंपनी के प्रबंध निदेशक डॉ. हनुमान प्रसाद के अनुसार, उनकी कंपनी छत्तीसगढ़ के साथ-साथ स्पेन में भी क्रिटिकल मिनरल्स की माइनिंग कर रही है। उन्होंने बताया कि यह पहल भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक संसाधन प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

ड्रिलिंग से मिलेगी सटीक जानकारी
कंपनी के अनुसार, भालुकोना क्षेत्र में खनिज संभावनाओं की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक ड्रिलिंग अभियान चलाया जा रहा है। प्रथम चरण में चट्टानों के नमूनों और भू-भौतिकीय संकेतों से खनिजों की उपस्थिति के संकेत मिले थे। अब ड्रिलिंग के जरिए भूमिगत संसाधनों की वास्तविक स्थिति और गहराई का पता लगाया जाएगा।

EV, बैटरी और रक्षा क्षेत्र के लिए अहम
निकल, कॉपर और प्लेटिनम ग्रुप एलिमेंट्स आधुनिक तकनीक की रीढ़ माने जाते हैं। इनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), बैटरी निर्माण, स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों और रक्षा उपकरणों में व्यापक रूप से होता है। ऐसे में इस खोज को भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
विशेषज्ञों के मुताबिक, ऊर्जा संक्रमण और इलेक्ट्रिफिकेशन के इस दौर में क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है। छत्तीसगढ़ जैसे खनिज संपन्न राज्य में इस तरह की परियोजनाएं औद्योगिक विकास को गति देने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेंगी।

राज्य सरकार ने 1 अप्रैल 2025 को इस ब्लॉक के लिए कंपोजिट लाइसेंस (प्रॉस्पेक्टिंग से माइनिंग तक) जारी किया था। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, भविष्य में यहां से प्रतिवर्ष लगभग 10,000 टन कॉपर और 10,000 टन निकल उत्पादन की संभावना जताई जा रही है।