स्वदेशी कोयले से स्टील उत्पादन में क्रांति: जिन्दल स्टील ने रचा इतिहास

06 Apr 2026      47 Views

रायपुर। भारत के अग्रणी स्टील उत्पादकों में शामिल जिन्दल स्टील ने उन्नत कोयला गैसीफिकेशन तकनीक के सफल उपयोग के साथ वैश्विक स्तर पर एक नई उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने पहली बार स्वदेशी कोयले से तैयार सिनगैस (Syngas) का उपयोग कर डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (DRI) का उत्पादन किया है, जिससे न केवल कम कार्बन उत्सर्जन वाला स्टील उत्पादन संभव हुआ है, बल्कि देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिली है। इस अभिनव तकनीक के माध्यम से जिन्दल स्टील ने विदेशी गैस और महंगे आयातित कोयले पर निर्भरता कम करते हुए स्वदेशी संसाधनों के बेहतर उपयोग का मार्ग प्रशस्त किया है। इतना ही नहीं, प्राकृतिक गैस, एलपीजी और प्रोपेन की कमी को दूर करने के लिए कंपनी ने गैल्वनाइजिंग एवं कलर कोटिंग लाइन भट्टियों में भी सिनगैस का सफल उपयोग किया है, जो स्टील उद्योग के इतिहास में पहली बार हुआ है। इस पहल से जहां ईंधन की कमी की समस्या का समाधान संभव होगा, वहीं उत्पादन लागत में कमी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही सिनगैस के उपयोग से ब्लास्ट फर्नेस संचालन में आयातित कोकिंग कोल पर निर्भरता घटाने और प्रति टन स्टील उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन को उल्लेखनीय रूप से कम करने में भी सफलता मिली है। 

जिन्दल स्टील, अंगुल के कार्यकारी निदेशक श्री पी.के. बीजू नायर के अनुसार स्वदेशी कोयले से बनी यह गैस आयातित मेथनॉल, अमोनिया और एलएनजी का प्रभावी विकल्प बन सकती है तथा यदि इसे कार्बन नियंत्रण तकनीक (CCUS) के साथ जोड़ा जाए तो भारत अंतरराष्ट्रीय मानकों (CBAM) पर भी खरा उतर सकता है। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार की राष्ट्रीय कोयला गैसीफिकेशन मिशन के तहत इस तकनीक को प्रोत्साहन मिल रहा है, जिससे भविष्य में इसके व्यापक उपयोग की संभावना है। जिन्दल स्टील का यह प्रयास न केवल सस्टेनेबल और किफायती स्टील उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को साकार करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।