20 Apr 2026 52 Views
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता प्लांट में 14 अप्रैल को हुए भीषण हादसे ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दुर्घटना में 24 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 36 मजदूर झुलस गए थे, जिनमें से 12 का इलाज अभी जारी है।
घटना की प्रारंभिक जांच में प्लांट प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद डभरा थाने में वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत 10 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
हादसे के दूसरे दिन 15 अप्रैल को औद्योगिक सुरक्षा विभाग के बॉयलर इंस्पेक्टर उज्जवल गुप्ता और उनकी टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।
एसपी प्रफुल्ल ठाकुर को सौंपी गई शुरुआती रिपोर्ट में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और संचालन में गंभीर त्रुटियों के संकेत मिले, जिसके आधार पर FIR दर्ज की गई।
इस कार्रवाई पर उद्योगपति नवीन जिंदल ने आपत्ति जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि किसी भी व्यक्ति, विशेषकर उच्च पदस्थ अधिकारी का नाम FIR में शामिल करने से पहले विस्तृत जांच और ठोस सबूत जरूरी हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि जब सरकारी कंपनियों या रेलवे में हादसे होते हैं, तो सीधे चेयरमैन का नाम शामिल नहीं किया जाता—ऐसे में निजी क्षेत्र के लिए भी समान मानक लागू होने चाहिए। हालांकि, उन्होंने घटना पर गहरा दुख भी व्यक्त किया।
हादसे के बाद संचालन और मेंटेनेंस से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी बारीकी से जांच की जा रही है।
सिंघीतराई प्रोजेक्ट में NGSL की टीम तैनात है, जहां प्रोजेक्ट हेड और साइट इंचार्ज के रूप में राजेश सक्सेना कार्यरत हैं। यूनिट-1 के दैनिक संचालन की जिम्मेदारी भी उनके पास बताई जा रही है।
मेंटेनेंस टीम बॉयलर, टर्बाइन और अन्य उपकरणों के रखरखाव के लिए जिम्मेदार थी, ऐसे में तकनीकी और संचालन स्तर पर संभावित चूक की जांच जारी है।
जानकारी के अनुसार, वेदांता ने पिछले वर्ष प्लांट के संचालन और मेंटेनेंस का कार्य NGSL को सौंपा था। इसमें मशीनों की निगरानी, तकनीकी खामियों की पहचान, सुरक्षा मानकों का पालन और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल था।
औद्योगिक सुरक्षा विभाग के सहायक संचालक अश्विनी पटेल ने पुष्टि की है कि सिंघीतराई प्लांट का संचालन NGSL द्वारा किया जा रहा था। वहीं वेदांता के PRO दीपक विश्वकर्मा ने भी बताया कि बॉयलर यूनिट-1 की जिम्मेदारी NGSL के पास थी।